Categories Posted inin Kabir Bhajan मत कर माया को अहंकार मत कर काया को अभिमान मत कर माया को अहंकार, मत कर काया को अभिमान। काया गार से काची, जैसे ओस का मोती। झोंका पवन का लग जाये, झपका पवन का लग जाये, काया धूल...