Categories Posted inin Bhajan मन तड़पत हरि दर्शन को आज मन तड़पत हरि दर्शन को आज मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज। आ विनती करत हूँ रखियो लाज ॥ तुम्हरे द्वार का मैं हूँ जोगी मेरी ओर नजर कब होगी...