राम राम जय राम राम, सिया राम राम जय राम राम।
राम राम जय राम राम, सिया राम राम जय राम राम।।
राम पधारे, श्रीराम पधारे, अवधपुरी में श्रीराम पधारे।।
राम पधारे, द्वार हमारे, संग सिया संग लखन पधारे।
अखियों के तुम तारे।।
शील, शक्ति, सौन्दर्य धारी, मंगल भवन अमंगल हारी।
अमृत जैसा नाम है इनका, स्वर्ग सरीखा धाम है इनका।।
मितभाषी, गुणवान मनोहर, अधरों पर मुस्कान मनोहर।
राम रमैया घट-घट वासी, गुण गायें सुर नर सन्यासी।।
घी के दीपक खूब जलाऊँ, घर-आँगन में चौक सजाऊँ।
तन-मन वारूँ प्राणों से प्यारे, अखियों के तुम तारे।।
केवट तारा, शबरी तारी, सुध लेने अब आये हमारी।
कबसे अयोध्या राह निहारे, अखियों के तुम तारे।।
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