गुरु सिंगाजी की सजी रे बारात कुटुम सब भेलों हुयों बाबा ओहम सोहम रथ जोतिया, रथ गया हे बेकुंठ धाम, कुटुम सब भेलों हुयों, गुरु सिंगाजी की सजी रे बारात....
महाराज सिंगाजी संत महाराज सिंगाजी संत, ज्ञान की बाजी नौबत महाराज सिंगाजी संत. ब्रह्मगिर को हुआ आचरज, कहो कोन भया रे सामरथ, मनरंग को साकित किया, जेने बता दिया रे...
मन तोहे किहि बिध मैं समझाऊँ। सोना होय तो सुहाग मंगाऊँ बंकनाल रस लाऊँ। ग्यान सबद की फूँक चलाऊँ, पानी कर पिघलाऊँ। घोड़ा होय तो लगाम लगाऊँ, ऊपर जीन कसाऊँ।...
माया महाठगिनी हम जानी, निर्गुण फांस लिये डोले बोले मधुरी बाणी। केसव के कमला होइ बैठी, शिव के भवन भवानी, पंडा के मूरत होई बैठी, तीरथ हू में पानी। जोगी...