Categories Posted inin Kabir Bhajan कबीर दोहे 50 ज्ञान और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि Here are 50 dohas (couplets) by Kabir, a 15th-century Indian mystic poet and saint, whose writings influenced the Bhakti movement. These dohas are rich in spiritual and philosophical wisdom. 1.... Continue Reading
Categories Posted inin Kahtu Shyam ji ke bhajan तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना हारे के सहारे मेरे हारे के सहारे मेरी हार हराओ ना अंधेरो की... Continue Reading
Categories Posted inin Kabir Bhajan मत बाँधो गठरिया अपयश कै मत बाँधो गठरिया अपयश कै, मत बाँधो गठरिया अपयश कै । धरम छोड़ि अधरम को धायो, नैया डुबायो जनम भर कै । मत बाँधो गठरिया अपयश कै… भाई बन्धु परिवार... Continue Reading
Categories Posted inin Kabir Bhajan हरि बिन कौन सहाई मन का हरि बिन कौन सहाई मन का। मात पिता भाई सुत बनिता, हित लागो सब फन का। हरि बिन कौन सहाई मन का। आगे को कुछ तुलहा बांधो, क्या मरवासा मन... Continue Reading
Categories Posted inin Bhajan रंग महल के दस दरवाज़े रंग महल के दस दरवाज़े, रंग महल के दस दरवाज़े ना जाने कौन सी खिड़की खुली थी, सैयां निकस गए मै ना लड़ी थी सर को झुकाए मई तो चुपके... Continue Reading
Categories Posted inin Bhajan राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी, राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी, राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी, राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी, आएँगे बिहारी चले आएँगे बिहारी, राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥ राधा मेरी चंदा, चकोर है बिहारी,... Continue Reading
Categories Posted inin Bhajan घायल हो गई पल में गजरा गिर गया जमुना जल में घायल हो गई पल में, गजरा गिर गया जमुना जल में, जमुना के तट पर, मारी नजरिया ऐसी सांवरिया ने, की गजरा गिर गया जमुना जल में।। लेने गगरिया गई... Continue Reading
Categories Posted inin Bhajan ना जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते है ना जाने कौन सें गुण पर, दयानिधि रीझ जाते है, यही हरि भक्त कहते है, यही सदग्रंथ गाते है।। नही स्वीकार करते है, निमंत्रण नृप दुर्योधन का, विदुर के घर... Continue Reading
Categories Posted inin BhajanBhole Baba Ke Bhajan शिव शम्भू सा निराला कोई देवता नहीं है शिव शम्भू सा निराला, कोई देवता नहीं है, जैसा भी है डमरू वाला, कोई देवता नहीं है।। सर पे बसी है गंगा, माथे पे चन्द्रमा है, नंदी की है सवारी,... Continue Reading
Categories Posted inin BhajanSundarkaand Paath संपूर्ण सुंदरकांड पाठ – श्लोक – कथा प्रारम्भ होत है । सुनहुँ वीर हनुमान ।। राम लखन जानकी । करहुँ सदा कल्याण ।। जामवंत के बचन सुहाए । सुनि हनुमंत हृदय अति भाए... Continue Reading