मुखड़ा
तेरे दरबार का पाने नज़ारा, मैं भी आया हूँ ।
ज़रा दे दो माँ चरणों में सहारा, मैं भी आया हूँ ।।
सुना है दर पे तेरे इस जहाँ की, हर खुशी मिलती ।
जगा दो सोई किस्मत का सितारा, मैं भी आया हूँ ।।
अंतरा 1
तू जो दया ज़रा सी कर दे,
सर पे हाथ मेरे माँ धर दे ।
हो जाए दुखड़े दूर,
कट जाए हर एक विपदा मेरी ।।
मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।
माँ मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।।
अंतरा 2
तेरी कृपा हो जाए, बिगड़े काम बने सब मैया ।
मैं रब को न मानूँ, मेरे लिए तू ही रब मैया ।।
तेरी ज्योत जगे दिन, दुनिया माने शक्ति तेरी ।
मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।।
अंतरा 3
कहते हैं तेरे दिल में, नदिया ममता की है बहती ।
करे प्यार दुलार बड़ा, तू भक्तों के अंग-संग रहती ।।
तेरी दया का अंत नहीं, कर दे दूर मुसीबत मेरी ।
मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।।
अंतरा 4
मूर्ख अज्ञानी हूँ, मुझको ज्ञान नहीं है कोई ।
तेरी महिमा क्या जानूँ, पूजा-ध्यान नहीं है कोई ।।
गर खोल दे अंखिया तू, फिर तो खुल जाए किस्मत मेरी ।
मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।।
अंतरा 5
जग जननी ऐ माता, ज्योतों वाली शेरों वाली ।
तू चाहे तो भर दे पल में, भक्त की खाली झोली ।।
कहे फिर तू भँवरों में, नैया फँसी है नैया मेरी ।
मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।।
मुखड़ा दोहराएँ
तू जो दया ज़रा सी कर दे, सर पे हाथ मेरे माँ धर दे ।
हो जाए दुखड़े दूर, कट जाए हर एक विपदा मेरी ।।
मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।
माँ मैं खड़ा द्वारे पे पल पल, करूँ मैं विनती तेरी ।।
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