है मेरे गीत तेरे लिए राधा, लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा।
जब-जब गाऊँ, बस यही चाहूँ, रास रचाएँ कृष्ण और राधा।।
नज़रें तुमसे हटती नहीं, ये लीला है या सम्मोहन।
राधा जी को कैसे रिझाऊँ, इतना बता दो हे मोहन।।
भक्ति रंग चढ़ा है ऐसा, जैसे मीरा पे चढ़ा था वैसा।
जग की चमक फीकी लगे, बताओ जादू ये कैसा।।
स्वस्ति बने वो दर्पण प्यारा, जिसमें देख श्रृंगार करे राधा।।
हालात सभी स्वीकार किए, बाकी सब तुझ पर छोड़ दिए।
नाम तेरे से लगी है प्रीत, बंधन अपना जोड़ लिए।।
मेरी हर आस अब तुमसे, जीत और हार अब तुमसे।
चरणों में बँध घुँघरू बनकर, मेरी झंकार अब तुमसे।।
क्या लिखूँ मैं तुम पर राधा, अक्षर तुम ही, शब्द हो राधा।।
है मेरे गीत तेरे लिए राधा, लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा।
जब-जब गाऊँ, बस यही चाहूँ, रास रचाएँ कृष्ण और राधा।।
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